Vol. 1, Issue 11, Part D (2015)
हिंदी के अन्तर्राष्टªीयकरण में प्रवासी लेखकों का योगदान
हिंदी के अन्तर्राष्टªीयकरण में प्रवासी लेखकों का योगदान
Author(s)
किरण ग्रोवर
Abstract
भूमंडलीकरण से प्रवास की प्रिई˜या एवं प्रवासी हिंदी साहित्य में भी विस्तार हुआ। हिंदी साहित्य में जिस प्रभावशाली ढंग सेत्रष्ष् विदेशोंत्रष्ष् मेंत्रष्ष् लिखेत्रष्ष् जानेत्रष्ष् वालेत्रष्ष् हिंदीत्रष्ष् साहितयत्रष्ष् कोत्रष्ष् पिदलेत्रष्ष् दो-तीेनत्रष्ष् दशकोंत्रष्ष् पहचानत्रष्ष् मिलीत्रष्ष् हेत्रष्ष् इसकात्रष्ष् कारणत्रष्ष् प्रवासत्रष्ष् कीत्रष्ष् प्रिई˜यात्रष्ष् आइ्रत्रष्ष् निरनतरता,त्रष्ष् विश्वत्रष्ष् बाजार,त्रष्ष् दूरत्रष्ष् संचार,त्रष्ष् कंपयूअरत्रष्ष् ई˜ांतित्रष्ष् केत्रष्ष् सािा-सािात्रष्ष् विश्वीारत्रष्ष् ुेलेत्रष्ष् रचनाकारोंत्रष्ष् कात्रष्ष् वििीाननत्रष्ष् माई¨यमोंत्रष्ष् साहितियकत्रष्ष् जुउ़ावत्रष्ष् वत्रष्ष् विचारत्रष्ष् विमश्रत्रष्ष् हेंत्रष्ष् पत्रिष्काओंष् द्वारात्रष्ष् प्रवासीत्रष्ष् अंकत्रष्ष् निकालात्रष्ष् जाना,त्रष्ष् सममेलन,त्रष्ष् पुरसकारत्रष्ष् आदित्रष्ष् सईन्न्ाात्रष्ष् ओरत्रष्ष् महईन्न्ाात्रष्ष् इंगितत्रष्ष् करत्रष्ष् रहेत्रष्ष् हेंत्रष्ष् विदेहृ€ात्रष्ष् रहनेत्रष्ष् रचनाओंत्रष्ष् अलगत्रष्ष् देहृ€ाोंत्रष्ष् परिसििातियोंत्रष्ष् उललेखत्रष्ष् मिलतात्रष्ष् जिससेत्रष्ष् हिनदीत्रष्ष् अनतरा्रष्अªीयत्रष्ष् विकासत्रष्ष् होतात्रष्ष् अपनीत्रष्ष् संवेदना,त्रष्ष् विशिष्अत्रष्ष् सोचत्रष्ष् जोकित्रष्ष् संसकारत्रष्ष् रूपत्रष्ष् अपनेत्रष्ष् परिवेशत्रष्ष् ग्रहणत्रष्ष् करतेत्रष्ष् उनकेत्रष्ष् दृहिृ€न्न्अकोणत्रष्ष् आीाासत्रष्ष् लेखकोंत्रष्ष् यिाािा्रपरकत्रष्ष् दश्रनत्रष्ष् सािात्रष्ष् संसईष्तियोंत्रष्ष् अकराहअत्रष्ष् ीाूमंउलीकरणत्रष्ष् दबावत्रष्ष् दिखाइ्रत्रष्ष् पउ़तात्रष्ष् ीाारतीयत्रष्ष् एवंत्रष्ष् पश्चिमीत्रष्ष् संसईष्तित्रष्ष् बीचत्रष्ष्झूलते प्रवासी भारतीयों के मानसिक आन्दोलन का चित्रण प्रवासी हिंदी साहित्य में हुआ है। प्रवासी भारतीय समाज की सच्चाई को पूरी अन्तरंगता से उद्घाटन करने वाले बहुतेरे कथाकार यथा ईष्ष्णलाल बिहारी, अभिमन्यु अनत, जोगिन्द्र सिंह कंवल,विवेकानन्द शर्मा, हरिदेव सहतू, पुष्पिता अवस्थी, वेद प्रकाश बटुक, सुषम बेदी, अंजना संधीर, गौतम सचदेव, तेजेन्द्र शर्मा, पदमेश गुप्त, अचला शर्मा हैं जिन्होंने प्रवासी जावन के अनुभवों व गहन सोच का परिचय दिया है जिससे हिन्दी साहित्य का अन्तर्राष्टªीय विकास संभव हुआ है। हिन्दी में रचे जा रहे प्रवासी साहित्य का अपना वैहिृ€ाहृ€न्न्ट्य है जो उसकी संवेदना, परिवेहृ€ा, जीवन दृहिृ€न्न्ट तथा सरोकारों में दिखाई देता है।ढध्ंगझ
How to cite this article:
किरण ग्रोवर. हिंदी के अन्तर्राष्टªीयकरण में प्रवासी लेखकों का योगदान. Int J Appl Res 2015;1(11):237-240.