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International Journal of Applied Research
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ISSN Print: 2394-7500, ISSN Online: 2394-5869, CODEN: IJARPF

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Peer Reviewed Journal

Vol. 4, Issue 9, Part D (2018)

कविता ओ यथार्थ आओर राजकमल

कविता ओ यथार्थ आओर राजकमल

Author(s)
रौ-रु039यान कुमार यादव
Abstract
कोनो वादक मूलमे दू -बबमकपसयकारक चिन्तन विद्यमान रहैत अछि मानवतावाद आ यथार्थवाद। कार्लमार्क्स मानव मस्ति-ुनवजयके -पमगबसय ओकर चेतना आ समाजिक अस्तित्वक संग मानवतावादके -पमगबसय सम्बन्ध करबैत बु-ंउचयहजयैत छथि। दोसर पक्ष यथार्थवाद, साहित्यमे मानव जीवनक यथार्थ-ंउचयंउचयचित्रण थिक। कार्लमाक्र्सक द्वन्द्वात्मक भौतिकवादपर आधारित ई -बबमकपसयगतिवादी विचारधारा कविवर वैद्यनाथ मिश्र ‘यात्री’क काव्यमे आयल अछि। सामाजिक यर्थाथक नग्न चित्रांकन व्यंग्य-ंउचयंउचयव-व्ेसंेीयोक्तिक संग खुलि क-उपककवजय आयल अछि। ओना यात्रीजी कहियो, कतहु अपनाके -पमगबसय कोनो वादक बन्हनमे नहि लपेट-उपककवजय चाहलनि। ने ई अपनाके -पमगबसय -बबमकपसयगतिवादी कवि होयबाक दाबा कयलनि आ ने -बबमकपसययोगवादक अग्रदूत मानलनि, मुदा हिनक कविताक पद-ंउचयंउचयपदमे रागात्मक अनुभूतिक आधारपर व्यंग्यार्थ आ लक्ष्यार्थमे यथार्थक चित्रण तथाएकसएक अभिनव बिम्ब -बबमकपसयतीकक -बबमकपसययोग सहजहि हिनका -बबमकपसयगतिवादी, -बबमकपसययोगदवादी कहबा लेल वाध्य क-उपककवजय दैत अछि।
Pages: 269-271  |  1173 Views  268 Downloads


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How to cite this article:
रौ-रु039यान कुमार यादव. कविता ओ यथार्थ आओर राजकमल. Int J Appl Res 2018;4(9):269-271.
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