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International Journal of Applied Research
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ISSN Print: 2394-7500, ISSN Online: 2394-5869, CODEN: IJARPF

International Journal of Applied Research

Vol. 6, Issue 11, Part C (2020)

ललीतराघव महाकाव्य - एक विमर्ष

Author(s)
समीर विश्वाल
Abstract
प्राचीन काल में जव लेखन सामग्री उपलब्ध नहीं था तव उस समये दार्शनिक, काव्यशास्त्रज्ञ, व्याकरण,समाजसुधारक स्वस्वविचार आदि को अपने हाथोसे लिखकर प्रस्तुत करते थे । उनमें से श्रीनीवास विरचीत ललीतराघव माहाकाव्य अन्यतम है । इस ग्रन्थ अभितक् प्रकाशित नही हुआ है, लेकिन अबतक बो संग्रहालय में सुरक्षीत है । इस ग्रन्थ 22 (द्वादशविंशति) सर्ग विशिष्ट एक महाकाव्य हे । इस महाकाव्य संपूर्ण रामायण पर आधारित है । अगर मातृका का पाठसंपादन प्रक्रिया अवलम्बन करेगें तो पुरातन ज्ञानवैभव का विनाश नही होगा । इसलिए लुप्तमातृका का संस्कुतवाङ्गमय मे पुर्नजीवित करने केलिए इस शोध पत्र प्रस्तुत किया जा रहा है ।
Pages: 157-159  |  78 Views  4 Downloads
How to cite this article:
समीर विश्वाल. ललीतराघव महाकाव्य - एक विमर्ष. Int J Appl Res 2020;6(11):157-159.
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