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International Journal of Applied Research
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ISSN Print: 2394-7500, ISSN Online: 2394-5869, CODEN: IJARPF

International Journal of Applied Research

Vol. 7, Issue 2, Part C (2021)

Character of body (Prakrity) (Assessment of pralamb bahu, prithupeen vaksha & mahalalat)

Author(s)
अमर नाथ
Abstract
आयुर्वेदीय दृष्टि से प्रकृति ज्ञान का अपना विशेष स्थान है। प्रत्येक व्यक्ति का विशिष्ट शारीरिक स्वरूप तथा मानसिक स्वभाव होता है। इसे उसकी प्रकृति कहते है। प्रकृति शब्द का तात्पर्य संस्कृत भाषा के अनुसार -
प्रकरोति इति प्रकृतिः। अर्थात जो अन्य तत्वों को पैदा करती है, किन्तु वह स्वतः किसी एक से निर्मित नहीं होती है।
प्रकृति शब्द दो शब्द से मिलकर बना है -
प्र + कृति प्र का तात्पर्य प्रकृष्ट है। कृति का तात्पर्य सृष्टि से है। यह आयुर्वेद में वर्णित मूल प्रकृति है।
प्रकृति एक व्यापक अर्थकारी शब्द है। प्रलम्बबाहु, प्रिथुपिनवक्ष तथा महाललाट का उल्लेख प्रकृति परीक्षण के अन्तर्गत किया गया हैै।
Pages: 148-150  |  31 Views  4 Downloads
How to cite this article:
अमर नाथ. Character of body (Prakrity) (Assessment of pralamb bahu, prithupeen vaksha & mahalalat). Int J Appl Res 2021;7(2):148-150.
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