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International Journal of Applied Research
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Vol. 10, Issue 12, Part E (2024)

सौन्दरनन्द महाकाव्य पर औपनिषदिक प्रभाव

सौन्दरनन्द महाकाव्य पर औपनिषदिक प्रभाव

Author(s)
आनन्द कुमार
Abstract
महाकवि अश्वघोष संस्कृत वाङ्मय के क्रान्तदर्शी कवि और भारतीय दार्शनिकप्रज्ञा के मूर्धन्य प्रणेता हैं। इनकी गणना उन विरले दार्शनिक महाकवियों में से है जिन्होंने महाकाव्य के माध्यम से दार्शनिक सिद्धान्तों का प्रतिपादन किया है। इन्होंने कविता के माध्यम से बौद्धधर्म के सिद्धान्तों का विवेचन कर जनसाधारण के लिए सरलतापूर्वक सुलभ एवं आकर्षक बनाने का प्रयास किया है। इनकी सभी रचनाओं में बौद्धधर्म के सिद्धान्त प्रतिबिम्बित हुए हैं। भगवान् बुद्ध के प्रति अपरिमित आस्था तथा अन्य धर्मों के प्रति सहिष्णुता महाकवि अश्वघोष के व्यक्तित्व की अन्यतम विशेषता है। एक ओर अश्वघोष स्वतंत्र विचारक थे जिसके कारण उन्होंने बौद्धधर्म के महत्व को स्वीकार किया, तो दूसरी ओर वैदिकधर्म और पौराणिक साहित्य के प्रति भी उनकी गहरी आस्था दिखती है इसप्रकार उनमें बौद्धधर्म और वैदिक धर्म का विलक्षण संयोग परिलक्षित होता है।
अश्वघोष के दोनों महाकाव्य- बुद्धचरित और सौन्दरनन्द उत्कृष्ट कवित्व केसाथ-साथ बौद्ध दर्शन के सूक्ष्मातिसूक्ष्म सिद्धान्तों का चरम निदर्शन हैं। महाकविने दोनों महाकाव्यों में बड़ी कुशलता से कथानक का प्रवाह सुरक्षित रखते हुए अपने उत्कृष्ट दार्शनिक वैदुष्य को काव्यात्मकता से संवलित कर बौद्ध सिद्धान्तों को दृढ़ आधार प्रदान किया है।
Pages: 320-323  |  126 Views  52 Downloads


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How to cite this article:
आनन्द कुमार. सौन्दरनन्द महाकाव्य पर औपनिषदिक प्रभाव. Int J Appl Res 2024;10(12):320-323. DOI: 10.22271/allresearch.2024.v10.i12e.12973
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