Vol. 10, Issue 8, Part B (2024)
उषाकिरण खान की कहानी ‘मौसम का दर्द’ में चित्रित प्रासंगिक-पक्ष
उषाकिरण खान की कहानी ‘मौसम का दर्द’ में चित्रित प्रासंगिक-पक्ष
Author(s)
प्रिया कुमारी, अमित कुमार
Abstract
महिला रचनाकारों ने हिंदी कथा-लेखन के माध्यम से साहित्य के साथ-साथ समाज को नयी दिशा देने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इनकी यही भूमिका इन्हें समाज में स्थापित करने के साथ ही हिंदी-पाठकों के अतिरिक्त हिंदी से इतर पाठकों के बीच भी स्थापित किया है। उषाकिरण खान भी ऐसी ही शीर्ष महिला लेखाकिकाओं में अपना अहम स्थान रखती हैं। इनकी रचनाएँ सामाजिक सरोकार से ताल्लुक रखने के साथ ही भारतीय ग्रामीण परिवेश से जुड़ी हुई है। इन्होंने ‘मौसम का दर्द’, ‘दूब-धान’, ‘जलकुंभी’, ‘नटयोगी’ और ‘घर से घर तक’ आदि जैसी कहानियों के माध्यम से समाज के कई ऐसे प्रासंगिक पक्षों को रखने की कोशिश की है, जो आज भी बेहद प्रासंगिक होने के साथ-साथ कालजयी भी है। इनका मन कहानियों में खूब रमा है। इन्होंने कहानियों के माध्यम से अपनी अभिव्यक्ति को खुलकर बयाँ की है। उषा जी ने न केवल ग्रामीण परिवेश को अपनी कहानियों में स्थान देती हैं, बल्कि शहरी जीवन को भी अपनी विश्लेषणात्मक दृष्टि से गहन पड़ताल करती है। उषाकिरण खान ने हिंदी के साथ-साथ मैथिली में भी दर्जनों उपन्यास व कहानियां लिखी हैं। इसके अलावा वे बाल-साहित्य और नाटक-लेखन के लिए भी जानी जाती हैं।
How to cite this article:
प्रिया कुमारी, अमित कुमार. उषाकिरण खान की कहानी ‘मौसम का दर्द’ में चित्रित प्रासंगिक-पक्ष. Int J Appl Res 2024;10(8):124-126.