ISSN Print: 2394-7500, ISSN Online: 2394-5869, CODEN: IJARPF
कला के माध्यम से शैक्षणिक, व्यक्तिगत विकास और सकारात्मकता । कला और शिक्षा का गहरा संबंध है। बच्चे की प्रारंभिक शिक्षा घर पर ही होती है। बच्चे का व्यवहार और सोचने की क्षमता घर के माहौल पर निर्भर करती है। जब बच्चा शैशवावस्था में पहली बार पेंसिल पकड़ता है, तो वह क्षैतिज और तिरछी रेखाएँ खींचता है। यह उसके द्वारा बनाया गया पहला चित्र होता है। ये छड़ी जैसी क्षैतिज और तिरछी आकृतियाँ बच्चों के विकास के साथ, तेजी से सजीव चित्रों में बदल जाती हैं। और सबसे पहले वह अपने माता-पिता को ध्यान में रखकर उन्हें चित्रित करने की पूरी कोशिश करता है। इस समय उसकी आयु लगभग 4-5 वर्ष होती है। इस बिंदु तक लड़के और लड़की का संघर्ष उन्हें आत्म-संतुष्टि और खुशी देता है।
यहाँ पर दूसरा महत्पूर्ण भूमिका शिक्षा में प्राथमिक विद्यालयों की होती है | जहां पर निश्चित और निर्धारित समय में अनुशासित रूप में शिक्षा दी जाती है| वही अगर शिक्षा की बात की जाय, तो शिक्षा केवल किताबी रह गई है | जहाँ स्कूल के होमवर्क को मन मार कर करना ही पड़ता है | जिससे बच्चो में धीरे-धीरे, सृजनात्मकता, समस्या को सुलझाने की क्षमता, आलोचनात्मक सोच कम होती जा रही है | क्योंकि शिक्षक भी कला को अन्य विषयो की तुलना में काम महत्वपूर्ण समझते है | जबकि कला का प्रारंभिक शिक्षा में महत्व अन्य विषयो की तुलना में कही अधिक है |