Vol. 11, Issue 11, Part B (2025)
मौलिक अधिकारों की रक्षा के लिए न्यायिक प्रक्रिया को अधिक सुलभ और सस्ता बनाने के लिए नए तरीके खोजना
मौलिक अधिकारों की रक्षा के लिए न्यायिक प्रक्रिया को अधिक सुलभ और सस्ता बनाने के लिए नए तरीके खोजना
Author(s)
दलगंजन सिंह
Abstractभारतीय संविधान नागरिकों को व्यापक मौलिक अधिकार प्रदान करता है, जिनका उद्देश्य समानता, स्वतंत्रता, और गरिमा की रक्षा करना है। परंतु इन अधिकारों की वास्तविक सुरक्षा तभी संभव है जब न्यायिक प्रक्रिया सभी के लिए सुलभ, त्वरित और सस्ती हो। वर्तमान में न्यायिक प्रणाली में अत्यधिक विलंब, महंगा न्याय, तकनीकी जटिलताएँ और संसाधनों की कमी जैसी चुनौतियाँ आम नागरिक के मौलिक अधिकारों के संरक्षण में बाधक बन रही हैं।
यह शोधपत्र न्यायिक प्रक्रिया की सुलभता और सस्तेपन के दृष्टिकोण से मौलिक अधिकारों की रक्षा के लिए संभावित सुधारों की खोज करता है। इसमें न्यायिक तंत्र के डिजिटल रूपांतरण, वैकल्पिक विवाद निपटान प्रणाली (ADR), कानूनी सहायता योजनाओं के सुदृढ़ीकरण, ई-कोर्ट्स, और न्यायिक जवाबदेही तंत्र के आधुनिकीकरण पर विस्तृत चर्चा की गई है।
साथ ही, यह अध्ययन यह भी रेखांकित करता है कि न्याय केवल उच्च वर्ग के लिए नहीं बल्कि समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुँच योग्य होना चाहिए। न्याय का लोकतंत्रीकरण ही संवैधानिक शासन की आत्मा है। अतः यह शोधपत्र इस दिशा में नीतिगत, संस्थागत और तकनीकी स्तर पर नवाचारों की खोज का प्रयास करता है।
How to cite this article:
दलगंजन सिंह. मौलिक अधिकारों की रक्षा के लिए न्यायिक प्रक्रिया को अधिक सुलभ और सस्ता बनाने के लिए नए तरीके खोजना. Int J Appl Res 2025;11(11):103-109. DOI:
10.22271/allresearch.2025.v11.i11b.12989