Vol. 11, Issue 11, Part B (2025)
सुमित्रानन्दन पंत का नए दौर में प्रवेश और ताज कविता
सुमित्रानन्दन पंत का नए दौर में प्रवेश और ताज कविता
Author(s)
डॉ- कुलवंत सिंह
Abstract
पंत आधुनिक काव्य-धारा के प्रतिभासपन्न एवं विकासोन्मुखी कवि हैं। उनकी काव्यधारा छायावाद, रहस्यवाद, प्रगतिवाद, अन्तश्चेतनावाद और मानवतावाद के कूलों को समेट प्रवाहित हुई है। छायावाद के प्रतिनिधि कवि पंत को काव्य सृजन की प्रेरणा प्रकृति से प्राप्त हुई। उनके काव्य में प्रकृति व मानवीय स्पन्दनों, चेष्टाओं व क्रियाओं की सुक्ष्म व कोमल अभिव्यक्ति बेहद मार्मिकता, प्रभावोत्पादकता और गत्यात्मकता से हुई है। छायावाद से प्रगतिवाद में प्रविष्ट हुए पंत, कोमलकान्त पल्लवों के झुरमुटों से निकल श्रमजीवियों की कठोर भूमि पर अवतरित होते हैं। पंत भारतीय अध्यात्मवाद और भौतिकवाद के समन्वय से नवीन संस्कृति की पृष्ठभूमि तैयार करते नज़र आते हैं। उनका काव्य सम्पूर्ण मानवता के लिए विश्वव्यापी सुख-शांति के विराट सौन्दर्याकाश का अवगाहन कर रहा है। उनकी प्रगतिशील कविताओं में युग-जीवन और मानव-व्यक्तित्व प्राणन्वित हो उठा है। ‘ताज’ कविता में ‘प्रकृति के सुकुमार कवि’ ‘द्रुमों की मृदुल छाया’ छोड़ कर जग-जीवन के यथार्थ प्रांगण में उतर आए हैं। पंत का करूण-कलित हृदय जीवन की भीषण विषमताओं का करूण क्रन्दन सुन छटपटा उठता है। वह मानवीय अनुभूतियों की असाधारणता, विचित्रता और सूक्ष्मता सहज स्फुरण द्वारा नये आकर्षक प्रतीकों से पाठक के सम्मुख व्यक्त करते हैं। भाव और शिल्प के समन्वय से उनके काव्य में जो निखार आ गया है, वह अत्यन्त रमरीण और आकर्षक है।
How to cite this article:
डॉ- कुलवंत सिंह. सुमित्रानन्दन पंत का नए दौर में प्रवेश और ताज कविता. Int J Appl Res 2025;11(11):114-119.