ISSN Print: 2394-7500, ISSN Online: 2394-5869, CODEN: IJARPF
यह शोधपत्र भारतीय रंगमंच की एक प्रमुख प्रविधि"अनुकरण प्रविधि" के माध्यम से अभिनय प्रशिक्षण की प्रक्रिया का विश्लेषण करता है। अभिनय प्रशिक्षण में अनुकरण की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है, क्योंकि यह अभिनेता को यथार्थ और कल्पना के मध्य संतुलन स्थापित करने में सक्षम बनाती है। किसी चरित्र अथवा भावना का सूक्ष्म अनुकरण करते समय अभिनेता केवल उसके बाह्य स्वरूप को ही नहीं, बल्कि उसकी आंतरिक अनुभूति को भी आत्मसात करता है।
भारतीय अभिनय पद्धति में यह प्रविधि अभिनय के मूल में स्थित है, जो अवलोकन, स्मृति, संवेदनशीलता और मनोवैज्ञानिक अनुकरण जैसे तत्वों के विकास पर बल देती है। भरतमुनि के नाट्यशास्त्र से लेकर आधुनिक मनोवैज्ञानिक सिद्धांतों तक, अनुकरण को अभिनय के शारीरिक तथा आत्मिक स्वरूप के विकास की आधारशिला माना गया है।
अध्ययन से यह स्पष्ट होता है कि भारतीय दृष्टिकोण में अभिनय केवल बाह्य अभिव्यक्ति नहीं, बल्कि मानव अनुभवों और संवेदनाओं की पुनर्रचना है, जो अभिनेता और दर्शक के मध्य एक गहन भावात्मक संबंध स्थापित करती है। यह अनुकरण केवल शारीरिक क्रिया तक सीमित नहीं रहता, बल्कि यह अभिनेता के शारीरिक, मानसिक, भावनात्मक और वाचिक पक्षों को समग्र रूप से सम्मिलित करता है। इस प्रकार, अनुकरण की प्रक्रिया अभिनेता को पात्र की पूर्ण वास्तविकता में ढलने का अवसर प्रदान करती है, जिससे दर्शक उसे उस पात्र के रूप में स्वीकार कर सकें और उसके अनुभवों को आत्मसात कर सकें। यह अध्ययन अभिनय प्रशिक्षण को एक समग्र दृष्टिकोण से समझने और "अनुकरण" को उसकी मूल आत्मा के रूप में पुनर्परिभाषित करने का एक प्रयास है।