Vol. 11, Issue 8, Part E (2025)
सेवा केन्द्रों तथा ग्रामीण विकास की संकल्पना का भौगोलिक अध्ययन
सेवा केन्द्रों तथा ग्रामीण विकास की संकल्पना का भौगोलिक अध्ययन
Author(s)
प्रवीण यादव
Abstract
यह अध्ययन ग्रामीण विकास, सेवा केन्द्रों, केन्द्रस्थल और विकास केन्द्रों की संकल्पनाओं तथा उनके क्षेत्रीय विकास में योगदान पर केन्द्रित है । वर्तमान समय में विकासशील देशों के लिए आर्थिक और प्रादेशिक विकास एक चुनौतीपूर्ण कार्य है क्योंकि संसाधनों की कमी, पूंजी और तकनीकी ज्ञान का अभाव इनके विकास में बाधा उत्पन्न करता है । सेवा केन्द्र, केन्द्रस्थल और विकास केन्द्र ग्रामीण क्षेत्रों में सामाजिक एवं आर्थिक गतिविधियों को गति प्रदान करते हैं और संतुलित विकास का आधार बनते हैं । क्रिस्टालर के केन्द्रस्थल सिद्धांत तथा पेराक्स के विकास ध्रुव सिद्धांत के अनुसार क्षेत्रीय विकास में केन्द्रों का पदानुक्रमिक स्वरूप महत्वपूर्ण है । समन्वित ग्रामीण विकास के लिए कृषि, उद्योग, सामाजिक-स्वास्थ्य और अवस्थापनात्मक विकास को प्राथमिकता देकर योजनाओं का निर्माण आवश्यक है । सेवा केन्द्र ग्रामीण क्षेत्रों में ज्ञान, सेवाओं और रोजगार के अवसर उत्पन्न कर जीवन स्तर को ऊँचा उठाने में प्रमुख भूमिका निभाते हैं ।