ISSN Print: 2394-7500, ISSN Online: 2394-5869, CODEN: IJARPF
डॉ. भीमराव अंबेडकर भारतीय समाज के उन प्रमुख समाज सुधारकों में से थे जिन्होंने सामाजिक न्याय, समानता और लोकतांत्रिक मूल्यों को केवल आदर्श मानकर ही नहीं अपनाया, बल्कि उसे व्यवहार और नीतियों में लागू करने का प्रयास किया । उनके विचार और कार्य मुख्य रूप से जाति आधारित भेदभाव, सामाजिक उपेक्षा, लैंगिक असमानता और आर्थिक असमानताओं को दूर करने पर केंद्रित थे । अंबेडकर का दृष्टिकोण यह मानता था कि स्वतंत्रता और समानता केवल राजनीतिक अधिकारों के माध्यम से नहीं प्राप्त की जा सकती, बल्कि इसके लिए सामाजिक संरचना, शिक्षा, अवसरों और आर्थिक संसाधनों में समानता सुनिश्चित करना अत्यंत आवश्यक है । उन्होंने यह स्पष्ट किया कि राजनीतिक स्वतंत्रता के बिना आर्थिक और सामाजिक स्वतंत्रता अधूरी है, और सामाजिक न्याय तभी साकार हो सकता है जब समाज के सभी वर्गों को समान अवसर प्राप्त हों । इस शोध आलेख का मुख्य उद्देश्य यह विश्लेषण करना है कि कार्ल मार्क्स की विचारधारा ने अंबेडकर के राजनीतिक और आर्थिक दृष्टिकोण को किस हद तक प्रभावित किया । मार्क्सवाद, जो मुख्य रूप से वर्ग संघर्ष, पूंजीवाद के शोषण और समाजवाद पर केंद्रित है, ने अंबेडकर के दृष्टिकोण को एक दार्शनिक और व्यावहारिक दिशा दी । विशेष रूप से, मार्क्स का विचार कि समाज की संरचना में आर्थिक आधार और उत्पादन संबंध सामाजिक असमानताओं को नियंत्रित करते हैं, अंबेडकर के आर्थिक सुधारों के दृष्टिकोण से प्रतिध्वनित होता है । आलेख में अंबेडकर और मार्क्स के विचारों के बीच समानताओं और अंतर का तुलनात्मक अध्ययन किया गया है ।
यह देखा गया है कि जबकि मार्क्स ने मुख्य रूप से आर्थिक वर्ग संघर्ष पर ध्यान केंद्रित किया, अंबेडकर ने भारतीय समाज में जाति और धर्म आधारित सामाजिक असमानताओं को आर्थिक और राजनीतिक अन्याय से जोड़कर देखा । अंबेडकर ने मार्क्सवाद के सिद्धांतों को भारतीय संदर्भ में अनुकूलित किया और इसे दलित और पिछड़े वर्गों के लिए सामाजिक न्याय और अधिकारों के एक प्रभावी उपकरण के रूप में प्रयोग किया । इसके अतिरिक्त, आलेख में अंबेडकर के राजनीतिक और आर्थिक सुधारों, उनके संविधान निर्माण में योगदान, शिक्षा और रोजगार के क्षेत्र में उनके दृष्टिकोण, और उनके सामाजिक आंदोलनों का विश्लेषण किया गया है । यह अध्ययन स्पष्ट करता है कि अंबेडकर ने न केवल आर्थिक समानता और राजनीतिक अधिकारों को जोड़कर देखा, बल्कि जाति आधारित शोषण और सामाजिक उपेक्षा के खिलाफ प्रभावी रणनीतियाँ विकसित कीं ।अंततः यह शोध आलेख यह निष्कर्ष प्रस्तुत करता है कि डॉ. अंबेडकर ने मार्क्सवाद से प्रेरणा ली, लेकिन उसे भारतीय समाज की विशिष्ट समस्याओं-जातिगत असमानता, धार्मिक भेदभाव और सामाजिक उपेक्षा के अनुसार अनुकूलित किया । अंबेडकर में मार्क्सवाद का प्रभाव उनके सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक दृष्टिकोणों में स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है, जिससे वह केवल एक विचारक ही नहीं, बल्कि समाज सुधारक और क्रांतिकारी नेता के रूप में भी खड़े होते हैं ।