Vol. 11, Issue 9, Part E (2025)
पृथ्वी सूक्त में निहित पर्यावरण-चेतना एवं संरक्षण की अवधारणा
पृथ्वी सूक्त में निहित पर्यावरण-चेतना एवं संरक्षण की अवधारणा
Author(s)
डॉ. अखिलेश कुमार त्रिपाठी
Abstract
पृथ्वी सूक्त में पृथ्वी को ‘माता’ स्वरूप मानकर उसके प्रति कृतज्ञता, सम्मान और संरक्षण का भाव अभिव्यक्त किया गया है। सूक्त में पृथ्वी की विविध जीवनदायी शक्तियों—वनस्पति, औषधि, जल, अन्न, पर्वत, नदियाँ एवं ऋतुओं-का उल्लेख करते हुए मनुष्य से इन प्राकृतिक संसाधनों के सतत, संयमित एवं संतुलित उपयोग की प्रेरणा दी गई है। पृथ्वी को क्षति न पहुँचाने, प्रदूषण से बचाने तथा उसके सौंदर्य और उर्वरता को सुरक्षित रखने का आग्रह इस सूक्त की मूल भावना है। इस प्रकार पृथ्वी सूक्त आधुनिक पर्यावरण-चेतना, पारिस्थितिक संतुलन और प्रकृति-संरक्षण की अवधारणा को वैदिक दृष्टि से समृद्ध आधार प्रदान करता है।
How to cite this article:
डॉ. अखिलेश कुमार त्रिपाठी. पृथ्वी सूक्त में निहित पर्यावरण-चेतना एवं संरक्षण की अवधारणा. Int J Appl Res 2025;11(9):380-382.