Contact: +91-9711224068
International Journal of Applied Research
  • Multidisciplinary Journal
  • Printed Journal
  • Indexed Journal
  • Refereed Journal
  • Peer Reviewed Journal

ISSN Print: 2394-7500, ISSN Online: 2394-5869, CODEN: IJARPF

Impact Factor: RJIF 5.2

International Journal of Applied Research

Vol. 3, Issue 3, Part M (2017)

अनूप अषेष का प्रबंध काव्य-माण्डवी कथा

Author(s)
डाॅ0 बीरेन्द्र कुमार त्रिपाठी
Abstract
माण्डवी कथा हिन्दी कविता की नवगीत विधा का पहला प्रबंध-काव्य है। किसी भी कृति का, किसी भी विधा में पहली प्रस्तुति का महत्व ऐतिहासिक होता है। अनूप अषेष ने कविता में कई नए अछूते प्रयोग किये हैं। बघेली बोली के प्रथम कवि के रूप में बघेली के भारतेन्दु होने का गौरव प्राप्त किया है। भारतीय साहित्य की बोलियों में नवगीत नहीं लिखे गये थे। अनूप अषेष ने बघेली बोली में इस विधा की शुरूआत की। इसी क्रम में खण्डकाव्य या प्रबंध काव्य में नवगीत शैली का प्रथम प्रयोग अनूप अषेष ने ‘माण्डवी-कथा’ में किया। माण्डवी जो त्रेतायुग में भगवान राम के अनुज महात्मा भरत की अध्यांगिनी होकर भारत भूमि में एक ऐसा अनोखा उदाहरण प्रस्तुत किया है जो युगो-युगों तक इस महान त्यागिनी के तप को हृदय के अधपके घाव की तरह बेदनापूर्ण तरह से सभी पृथ्वी वासी महसूस करते रहेंगे। पूर्व के महान कवियों ने भगवान राम की पत्नी सीता एवं लक्ष्मण की पत्नी उर्मिला का पवित्र रचित्र का बखान तो बहुत किये हैं। लेकिन महात्मा भरत की भार्या माण्डवी के घावों को देखने एवं समझने की हिम्मत शायद किसी भी कवि में नहीं थी, जिसके कारण यह महान् तपस्विनी की गौरव गाथा को साहित्य जगत में स्थान नहीं मिल पाया था। इसी छोभ से द्रवित होकर नवगीत कवि अनूप अषेष ने रामायण की प्रमुख पात्र जो पर्दे के अंदर थी उसको साहित्य जगत में एक महत्वपूर्ण स्थान देने का सराहनीय प्रयास किया है - जो प्रबंध काव्य में माण्डवी कथा के रूप में प्रसिद्व है।
Pages: 845-846  |  663 Views  21 Downloads
How to cite this article:
डाॅ0 बीरेन्द्र कुमार त्रिपाठी. अनूप अषेष का प्रबंध काव्य-माण्डवी कथा. International Journal of Applied Research. 2017; 3(3): 845-846.
Call for book chapter
International Journal of Applied Research