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International Journal of Applied Research
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ISSN Print: 2394-7500, ISSN Online: 2394-5869, CODEN: IJARPF

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International Journal of Applied Research

Vol. 3, Issue 1, Part L (2017)

आधुनिक मैथिली साहित्यमे लिलीरेक योगदान

Author(s)
विजय शंकर पंडित
Abstract
आधुनिक साहित्यमे लिलीरेक महत्वपूर्ण योगदान अनेक अछि। एहि। अध्यायमे हुनक योगदानक विवेचन आ विश्लेषण कएल जाएत। मुदा लिलीरेक सभसँ पैघ योगदान अछि जे हुनक साहित्यमे विचारधारा अछि। हुनक कथा हो अथवा उपन्यास, हुनक नाट्य-एकांकी हो अथवा आत्मकथा-कोनोने कोनो चिन्तन लऽ कऽ ओ मैथिली साहित्यक विशाल परिधिकें परिपुष्ट करैत छथि। हुनक साहित्य लेखनक बिन्दु-बिन्दु विश्लेषणसँ स्पष्ट होएत जे ओ आधुनिक विचारधारासँ जुड़ल छथि। हुनक साहित्यमे जमींदारी व्यवस्थाक तामझामक वर्णन भेटैत अछि, मुदा ओ जमींदारी व्यवस्थाक वास्तविकता आ तकर प्रभावक वर्णन कए जनताक प्रश्न आ आकुलताकें ठाढ़ करबामे सफल भऽ जाइत छथि। ओ सामंतवादक अनेक पक्षक वर्णन करैत छथि। सामंतवादसँ जुड़ल कला-संगीत, नृत्य आ भोजभातक चर्चा करैत छथि। मुदा सामंतवादमे हाहाकार आ आर्तनाद करैत महिलाक आकुल स्वरकंे प्रस्तुत कऽ दैत छथि। ओ लिखलन्हि तँ खुब लिखलन्हि। ओ जमि कऽ लिखलन्हि। ओ साफ-साफ शब्दमे लिखलन्हि। ओ चोरा-छिपाकऽ किछु। नहि लिखलन्हि। हुनक लेखनक यात्रा जमींदारी व्यवस्था आ सामंतवादसँ आरम्भ होइत अछि आ नक्सलवादक धुआँ-धधरा पर पहुँच जाइत छन्हि। ओ आर्थिक विभेद पर लिखलन्हि। ओ आर्थिक असमानताक वर्णन कएने छथि।
Pages: 890-891  |  185 Views  1 Downloads
How to cite this article:
विजय शंकर पंडित. आधुनिक मैथिली साहित्यमे लिलीरेक योगदान. Int J Appl Res 2017;3(1):890-891.
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