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ISSN Print: 2394-7500, ISSN Online: 2394-5869, CODEN: IJARPF

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Vol. 3, Issue 6, Part S (2017)

स्वराज संघर्ष के सशक्त स्तम्भ : मथुरा दास नन्दा

स्वराज संघर्ष के सशक्त स्तम्भ : मथुरा दास नन्दा

Author(s)
डॉ॰ शिव भारद्वाज
Abstract
बाल्यकाल में ही जिम्मेदारियों के थपेड़ों ने महाशय मथुरा दास नन्दा को छोटी उम्र में ही परिपक्व बना दिया था । आर्य समाज की विचारधारा से प्रभावित होकर वह स्वदेशी शासन का मोल जान चुके थे और युवा अवस्था में ही स्वराज संघर्ष में कूद गए । साइमन कमीशन के विरोध में लाहौर में हुए जलसे में वह भी शामिल थे तथा लाला लाजपत राय पर हुए लाठीचार्ज के साक्षी थे । तत्पश्चात आरम्भ हुए सविनय अवज्ञा आन्दोलन में भी महाशय जी ने अपनी पूर्ण भागीदारी दी । वह एक ओजस्वी वक्ता थे । मई १९३० को गुहाना (हरियाणा) में एक विशाल रैली सम्बोधित करने के बाद उन्हें गिरफ्तार कर दिया गया तथा छ: महीने के कठोर कारावास की सजा दी गयी । रिहा होने के बाद मथुरा दास नन्दा ने पूरे कांगड़ा क्षेत्र में स्वतन्त्रता आंदोलन की गतिविधियों में बढ़-चढ़ कर भाग लिया और साथ ही सामाजिक सरोकार के कार्यों में अपनी महत्वपूर्ण भागीदारी दी । छूआछूत तथा दलितोद्धार के प्रति लोगो को जागृत किया । स्वतन्त्रता के बाद भी मथुरा दास नन्दा राजनीतिक तौर पर सक्रिय रहे और लोगों की सेवा करते रहे । स्वराज संघर्ष के सशक्त स्तम्भ मथुरा दास नन्दा को उनके महान एवं पवित्र कृत्य के लिए भारत सरकार ने 1972 में ताम्रपत्र से सम्मानित किया ।
Pages: 1410-1415  |  264 Views  60 Downloads


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How to cite this article:
डॉ॰ शिव भारद्वाज. स्वराज संघर्ष के सशक्त स्तम्भ : मथुरा दास नन्दा. Int J Appl Res 2017;3(6):1410-1415.
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