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International Journal of Applied Research
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ISSN Print: 2394-7500, ISSN Online: 2394-5869, CODEN: IJARPF

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International Journal of Applied Research

Vol. 3, Issue 7, Part D (2017)

कुंकणा बोली के लोक-कथात्मक गीत

Author(s)
डॉ. उत्तम पटेल
Abstract
दक्षिणी गुजरात आदिवासी बहुल प्रदेश है। इसकी तीन मुख्य आदिवासी जातियाँ हैं-धोडिया, कुंकणा और वारली। इनकी बोलियों को इनके ही नाम से क्रमशः धोडिया, कुंकणा और वारली बोली कहते हैं। इन तीनों बोलियों में लोक-साहित्य की दृष्टि से कुंकणा बोली बहुत ही समृद्ध है जिसमें लोकगीत, लोककथा, पहेलियाँ आदि की भरमार है। कुंकणा जाति में कुछ लोकगीत ऐसे भी हैं जो किसी न किसी लोक-कथा पर आधारित हैं। जो कुंकणा जनजाति की मान्यताओं, रीतिरिवाजों, कुल संबंधी मान्यताओं को बारीकी से उभारते हैं। इनके कथात्मक गीत लौकिकता और अलौकिकता से युक्त हैं।
Pages: 274-277  |  704 Views  16 Downloads
How to cite this article:
डॉ. उत्तम पटेल. कुंकणा बोली के लोक-कथात्मक गीत. Int J Appl Res 2017;3(7):274-277.
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