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ISSN Print: 2394-7500, ISSN Online: 2394-5869, CODEN: IJARPF

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Vol. 4, Issue 1, Part F (2018)

‘सर्वंसहा’ हिन्दी का एक अनुपम राम-काव्य

‘सर्वंसहा’ हिन्दी का एक अनुपम राम-काव्य

Author(s)
डाॅ. भारती निश्छल
Abstract
हिन्दी-राम-काव्यधारा की आधुनिककालीन कृति ‘सर्वंसहा’ डाॅ॰ रमाकान्त पाठक की एक महत्त्वपूर्ण काव्य-पुस्तक है। इसमें राम-कथा के उन प्रसंगों और सन्दर्भों से सम्बन्धित प्रश्नों के उत्तर प्रस्तुत किये गये हैं, जिनके उत्तर ‘रामचरितमानस’ एवं अन्य राम-काव्यों में नहीं मिलते हैं। सीता के बाल-चरित से सम्बन्धित प्रसंगों के आपात रमणीय स्थल भी इस कृति में द्रष्टव्य हैं। याज्ञवल्क्य-आश्रम के पशु-पक्षियों के प्रति सीता का प्रेमपूर्ण व्यवहार, सीता के पुत्र-द्वय लव और कुश की बाल-सुलभ जिज्ञासाएँ और उनके उत्तर एवं सीता की अग्नि-परीक्षा से सम्बन्धित प्रश्नों के सर्वथा नूतन उत्तर इस कृति में कवि ने प्रस्तुत किये हैं। यह कृति हिन्दी का सम्भवतः प्रथम स्वगतोक्तिपरक आत्मसम्भाषात्मक राम-काव्य है, जिसे अँगरेजी में ‘मोनोलाॅग’ कहा जाता है, जिसमें सीता अपनी कथा स्वयं कहती है और स्वयं से कहती है।
Pages: 459-461  |  545 Views  81 Downloads


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How to cite this article:
डाॅ. भारती निश्छल. ‘सर्वंसहा’ हिन्दी का एक अनुपम राम-काव्य. Int J Appl Res 2018;4(1):459-461.
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