Contact: +91-9711224068
International Journal of Applied Research
  • Multidisciplinary Journal
  • Printed Journal
  • Indexed Journal
  • Refereed Journal
  • Peer Reviewed Journal

ISSN Print: 2394-7500, ISSN Online: 2394-5869, CODEN: IJARPF

IMPACT FACTOR (RJIF): 8.4

Vol. 4, Issue 1, Part F (2018)

वैदिक काल में उद्योग, शिल्प तथा व्यापार एवं वाणिज्य की स्थिति

वैदिक काल में उद्योग, शिल्प तथा व्यापार एवं वाणिज्य की स्थिति

Author(s)
पूनम कुमारी
Abstract
वैदिक काल के आरंभिक चरणों में लोगों को जो स्वतंत्रताएँ थी अब उनपर कुठाराघात होने लगा था जिसका प्रभाव समाज व्यवस्था पर पड़ रहा था। इसके कारण अर्थ व्यवस्था भी प्रभावित हो रही थी। पूर्व के युगों में व्यापारी उन्मुक्त होकर सामुद्रिक व्यापार किया करते थे। लेकिन सूत्रकारों ने समुद्र यात्रा को निषिद्ध कर दिया। बौधायन सूत्र में कहा गया कि शास्त्रास्त्र एवं ऊन का व्यापार तथा समुद्र यात्रा निंदित कर्म है। समुद्र यात्रा करने से मनुष्य पतित हो जाता है। इससे यह प्रतीत होता है कि सूत्रकाल में आकर सामूहिक व्यापार निषिद्ध माना जाने लगा था और विदेशी व्यापार बहुत ही सीमित हो चला था। जाहिर है कि इस तरह की जटिलताओं एवं वर्जनाओं के कारण शिल्पी एवं व्यापारी वर्ग प्रभावित होने लगे जिसका प्रभाव उद्योग एवं व्यापार पर पड़ने के साथ-साथ नगरीकरण पर भी पड़ा होगा। निश्चित रूप से वैदिक काल का अंतिम चरण उद्योग, व्यवसाय एवं नगरीकरण के लिये स्वस्थप्रद नहीं रह गया था।
Pages: 597-600  |  897 Views  570 Downloads


International Journal of Applied Research
How to cite this article:
पूनम कुमारी. वैदिक काल में उद्योग, शिल्प तथा व्यापार एवं वाणिज्य की स्थिति. Int J Appl Res 2018;4(1):597-600.
Call for book chapter
International Journal of Applied Research
Journals List Click Here Research Journals Research Journals