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International Journal of Applied Research
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ISSN Print: 2394-7500, ISSN Online: 2394-5869, CODEN: IJARPF

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Peer Reviewed Journal

Vol. 6, Issue 2, Part C (2020)

भारत में सरकारी अनुदान

भारत में सरकारी अनुदान

Author(s)
प्रेम परिहार
Abstract
भारत में अनुदान भीएक घुन की तरह ही है जो हमारी अर्थव्यवस्था की जड़ों को खोखला कर रही है। वस्तुओंएवं सेवाओं को उपलब्ध कराने की लागत तो अधिक होती है किन्तु उपभोक्ता हित हेतु कम कीमत पर उपलब्ध करायी जाती है। योजनाबद्ध विकास के अन्र्तगत गरीब तबके के लोगों को राहत देने के सब्सिडी का प्रावधान किया गया है परन्तु गैर योजनागत खर्च में वृद्धि होने के कारण राजकोषीय घाटे में भारी वृद्धि होती है। देश में 1980-ंउचय81 वर्ष में अनुदान का बो-हजय केवल 1912 करोड़ रूपये ही था जो वर्ष 2018-ंउचय19 में ब-सजय़कर 2.99 लाख करोड़ रूपये हो गया है। वर्ष 2019-ंउचय20 में खाद्य अनुदान 1,84,220 करोड़ रूपये, पेट्रोलियम में 37,487 करोड़ रूपये, ब्याज पर 25,056 करोड़ रूपयेएवं अन्य अनुदान में 12,199 करोड़ रूपये व्यय करने का प्रस्ताव था। जीडीपी काएक बड़ा हिस्सा खर्च होता है। कुल अनुदान का 50 प्रतिशत हिस्सा केवल खाद्य अनुदान में ही खर्च हो जाता है। आर्थिक उदारीकरण के लक्ष्यों में अनुदान में कमी लानाएक मुख्य लक्ष्य था यद्यपि इसमें अपेक्षित सफलता नहीं मिल पाई।
Pages: 155-157  |  1376 Views  300 Downloads


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How to cite this article:
प्रेम परिहार. भारत में सरकारी अनुदान. Int J Appl Res 2020;6(2):155-157.
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