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International Journal of Applied Research
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ISSN Print: 2394-7500, ISSN Online: 2394-5869, CODEN: IJARPF

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Peer Reviewed Journal

Vol. 6, Issue 4, Part C (2020)

सामाजिक यथार्थ की परिभाषा एवं स्वरूप

सामाजिक यथार्थ की परिभाषा एवं स्वरूप

Author(s)
विनय शंकर
Abstract
हिंदी साहित्य के क्षेत्र में कथा साहित्य के अंतर्गत कहानी, उपन्यासऐसी विधाएँ है, जिसके द्वारा सामूहिक मानव-ंउचयजीवन अपनी समस्त भावनाओंएवं चेतनाओं को अभिव्यक्त कर सकता है। कहानी और उपन्यास साहित्य के अंतर्गत किस्सागोई, कथ्य और शिल्प आदिऐसे गुण विद्यमान हैं, जो इनको साहित्य की अन्य विधाओं से श्रेष्ठ बनाते हैं। मानव जीवन के सामाजिक यथार्थ के विविध चित्रों को चित्रित करने का जितना अधिक अवकाश कथा-ंउचयसाहित्य में मिलता है, उतना अन्य साहित्यिक विधाओं में नहीं। कथा-ंउचयसाहित्य मानव-ंउचयजीवन की सामाजिक अभिव्यक्ति है। कथा साहित्य मानव जीवन का संपूर्ण चित्र प्रस्तुत करता है। साहित्यकार कहानी व उपन्यास के द्वारा सामाजिक यथार्थ काऐसा चित्र प्रस्तुत करता है, कि पाठक को प-सजय़ते समय हू-ंउचयब-ंउचयहू वह अपने सामने चित्रित होता दिखाई पड़ता है।
Pages: 168-171  |  1861 Views  700 Downloads


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How to cite this article:
विनय शंकर. सामाजिक यथार्थ की परिभाषा एवं स्वरूप. Int J Appl Res 2020;6(4):168-171.
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